‘हिमालय में जो पिघलता है’, नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ के बाद विदेश मंत्री ने भारत-चीन को दी चेतावनी, 300 भारतीय लापता

काठमांडू: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है ‘हिमालय में जो कुछ भी पिघलता है वह समुद्र के जलस्तर को बढ़ाता है।’ उन्होंने हिमालय के नाजुक पर्यावरण से नेपाल और भारत के लिए पैदा होने वाले साझा खतरों को लेकर भारत और चीन को आगाह किया है। खनाल ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को बनाए रखते हुए पर्यावरण के नजरिए से भारत-नेपाल संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने पर जोर दिया है।

गुरुवार को काठमांडू में एनडीटीवी से बात करते हुए नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा ‘नेपाल और भारत ने हमेशा ‘रोटी-बेटी’ और ‘सीता-राम’ के संदर्भ में अपने संबंधों की बात की है। हमारे रिश्तों में धर्म और सभ्यतागत संबंधों ने हमेशा बड़ी भूमिका निभाई है। लेकिन हमें अपने संबंधों को पर्यावरण के नजरिए से नए सिरे से देखना होगा।’

हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा ‘हिमालय में जो पिघलता है उससे समुद्र का जलस्तर बढ़ता है। हमने बुधवार को अपनी आंखों के सामने यही होते देखा। हिमालय में नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से पानी तेजी से नीचे की ओर आया जिससे नेपाल के कई इलाके तबाह हो गए।’

नेपाल के विदेश मंत्री ने बजाई खतरे की घंटी

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा ‘एक के बाद एक कई शहर कुछ ही घंटों में तबाह हो गए।’ उन्होंने आगे ‘चीन, नेपाल, भारत और भूटान पर्यावरण से जुड़े हुए हैं और हमारा साझा अस्तित्व और भविष्य हिमालय के पर्यावरण की सुरक्षा पर निर्भर करता है।’ पर्यावरण के क्षेत्र में और अधिक सहयोग का आह्वान करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि हालांकि इस बार बाढ़ का पानी नीचे की ओर ज्यादा दूर तक नहीं गया और भारत पर असर नहीं डाला लेकिन ऐसी घटनाएं अतीत में हुई हैं और भविष्य में भी हो सकती हैं। उन्होंने आगे कहा ‘अच्छी बात यह है कि इस बार बाढ़ का पानी नीचे की तरफ इतना आगे नहीं बढ़ा कि नेपाल से सटे भारतीय इलाकों पर असर डाले। लेकिन अतीत में ऐसा हो चुका है।’

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा इस समस्या पर भारत, चीन, नेपाल और भूटान पर्यावरण से जुड़े हुए हैं और उन्हें अपने मतभेदों को भुलाकर साथ मिलकर काम करना होगा। खनाल ने कहा ‘चीन, नेपाल, भारत और भूटान पारिस्थितिकी से जुड़े हुए हैं और हमारा अस्तित्व और भविष्य हिमालय की पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर निर्भर करता है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हो सकती है लेकिन हमें एकजुट होना होगा क्योंकि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है।’
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