डायबिटीज दुनिया भर में लोगों को अपना शिकार तेजी से बना रही है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार साल 2024 में भारत में 20 से 79 वर्ष के 89.8 मिलियन लोग डायबिटीज की समस्या झेल रहे हैं। इसका मुख्य कारण शरीर का बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधि ना करना और जेनेटिक माना जाता है। लेकिन अब यह भी रिसर्च की जा रही है कि क्या ब्लड ग्रुप की वजह से भी टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
ब्लड ग्रुप के चार मुख्य प्रकार A, B, AB और O होते हैं और इन्हें पॉजिटिव (+) या नेगेटिव (-) के रूप में भी बांटा जाता है। बीएमसी जर्नल के अनुसार ब्लड ग्रुप B के लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा हो सकती है।
पहले डॉक्टर की राय जानते हैं?
गाजियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन की डायरेक्टर डॉ. वंदना गर्ग के मुताबिक, कुछ खास ब्लड ग्रुप में डायबिटीज के मामले ज्यादा होने की रिपोर्ट्स हैं। लेकिन किसी एक ब्लड ग्रुप को टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क फैक्टर के क्राइटेरिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ना ही इसे मधुमेह के खतरे का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
ब्लड टाइप B और टाइप 2 डायबिटीज का क्या है आपसी तालमेल?
वहीं जर्नल डायबेटोलॉजिया की स्टडी के अनुसार ब्लड ग्रुप से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि O ब्लड ग्रुप की महिलाओं की तुलना में A ब्लड ग्रुप में डायबिटीज का खतरा तकरीबन 10 प्रतिशत, B ब्लड ग्रुप में 21 प्रतिशत और AB ब्लड ग्रुप में 17 प्रतिशत ज्यादा देखा गया। हालांकि रीसस फैक्टर (Rh+ या Rh-) का डायबिटीज के जोखिम का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। रीसस फैक्टर को आसान शब्दों में समझें, तो रीसस फैक्टर (Rh Factor) रेड ब्लड सेल्स की सतह पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन होता है जिससे यह तय होता है कि ब्लड ग्रुप पॉजिटिव (+) है या नेगेटिव (-)। अगर यह प्रोटीन मौजूद है, तो वह Rh-पॉजिटिव है और अगर मौजूद नहीं है तो वह Rh-नेगेटिव है।
वहीं जापान के क्यूरियस जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार रिसर्च के दौरान यह भी देखा गया कि ब्लड ग्रुप O वालों में डायबिटीज का जोखिम कम था, जबकि B ब्लड ग्रुप वालों में जोखिम ज्यादा था।
- जेनेटिक- टाइप 2 डायबिटीज अगर परिवार में किसी को है या थी, तो ऐसी स्थिति में टाइप 2 डायबिटीज खतरा ज्यादा हो सकता है।
- वजन- अगर शरीर का वजन जरूरत से ज्यादा है या अत्यधिक फैट है, तो ऐसी स्थिति भी कारण बन सकती है।
- उम्र- ज्यादातर मामलों में 35 वर्ष के बाद टाइप 2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। लेकिन 35 से कम उम्र में भी डायबिटीज की समस्या हो सकती है और यह भी जरूरी नहीं कि उम्र ज्यादा है तो आपको डायबिटीज हो ही।
- स्मोकिंग- तंबाकू का सेवन करना, स्मोकिंग करना या वेपिंग से टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ सकती है।
- प्रीडायबिटीज- यह तब होता है जब ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा हो, लेकिन डायबिटीज लेवल पर ना हो।
- प्रेग्नेंसी में डायबिटीज- प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।
- कोलेस्ट्रॉल की समस्या- बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण भी टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बना रहता है।
किन लक्षणों को रखना चाहिए ध्यान?
- बार-बार प्यास लगना।
- अत्यधिक भूख लगना।
- थकान महसूस होना।
- धुंधला दिखाई देना।
- हाथ या पैर में दर्द, सुन्न पड़ना या झुनझुनी होना।
- घाव का ठीक नहीं होना।
- बिना कारण वजन कम होना।
अगर ऐसे लक्षण नजर आयें तो इन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए।
अगर ऐसे लक्षण नजर आयें तो इन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए। इसलिए डॉक्टर से बात करें और लक्षणों की जानकारी दें। समय पर इलाज शुरू होने से आप इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कई कदम उठा सकते हैं, जैसे कि हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करना और डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की गईं सेवाओं को समय पर लेना। छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखकर इस समस्या से बचा जा सकता है या इसे आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं।