कुआलालंपुर: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर एक बयान दिया है। अनवर इब्राहिम ने कहा, नेहरू, सुकर्णो, झोउ एनलाई और न्क्रुमाह का दौर भविष्य के लिए उम्मीद की किरण था। ये उभरते हुए और नए आजाद देश अपनी पहचान बना रहे थे। लेकिन किसी तरह यह दौर फीका पड़ गया और बड़ी ताकतों ने इसे निगल लिया। उनका यह बयान दुनियाभर में जारी सैन्य तनाव के बीच आया है, जिससे बचने के लिए कई देश सैन्य गठबंधन बनाने की कोशिशें कर रहे हैं।
गुटनिरपेक्षता का सिद्धांत क्या था?
गुटनिरपेक्षता का सिद्धांत उस समय नए स्वतंत्र देशों को अमेरिका (पूंजीवादी गुट) और सोवियत संघ (साम्यवादी गुट) के सैन्य गठबंधनों से दूर रहकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता बनाए रखने का मार्ग था। एशिया और अफ्रीका के नए स्वतंत्र हुए देश किसी भी गुट में शामिल होकर अपनी संप्रभुता को खतरे में नहीं डालना चाहते थे। इसलिए पंडित नेहरू और उनके साथी नेताओं ने एक तीसरा रास्ता चुना, जिसे गुटनिरपेक्षता कहा गया।