भोपाल। भगवान श्रीकृष्ण की तरह महिला कैदियों के बच्चे पर जेल में जन्म लेने की छाप न लगे, इसके लिए 15 दिनों के पैरोल लेने की सुविधा भी है, पर जानकारी न होने से वे इसका लाभ नहीं ले पा रही हैं। जेल मुख्यालय गर्भवती महिलाओं का प्रसव मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल या जिला अस्पताल में ही करा रहा है। अब हाई रिस्क महिलाओं की पहचान सहित और पुख्ता निगरानी की जाएगी, जिससे इमरजेंसी में भी जेल में प्रसव की नौबत न आए।
हाल ही में नासिक की एक न्यायालय ने एक महिला को प्रसव के लिए इस आधार पर जमानत देने के लिए कहा था कि जेल में शिशु को जन्म देना किसी महिला के लिए सदमे से कम नहीं है। प्रदेश की जेलों में वर्तमान में 10 गर्भवती कैदी हैं। इनमें दो सजा प्राप्त और बाकी विचाराधीन हैं।
शासकीय अस्पतालों में प्रसव और जन्म प्रमाण पत्र से जेल का नाम हटाने के निर्देश
जेल महानिदेशक वरुण कपूर का कहना है कि बड़ी जेलों में भी अस्पताल हैं, पर महिला कैदियों को प्रसव के लिए पास के शासकीय अस्पताल में भेजा जाता है। गर्भावस्था के दौरान प्रति सप्ताह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ से उनकी जांच कराई जाती है।
शासन के यह भी निर्देश हैं कि कैदियों के जन्मे शिशु के जन्म प्रमाण पत्र में जेल का उल्लेख नहीं होना चाहिए। ऐसे में जेल वाले क्षेत्र या संबंधित अस्पताल का नाम जन्म स्थल के रूप में लिखा जाता है।