पाकिस्‍तानी महिला ने जब अटल जी को दिया था शादी का प्रस्‍ताव, मुंह दिखाई में मांगा कश्‍मीर, यूं बंद हो गई बोलती

इस्लामाबाद: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी हाजिर-जवाबी और मजाकिया अंदाज के लिए भी प्रसिद्ध थे। कल यानि 16 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि थी। उनका निधन 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ समय पहले अटल जी की पुरानी यादों को ताजा करते हुए कई ऐसे किस्से सुनाए जिनसे पूर्व प्रधानमंत्री के मजाकिया स्वभाव का पता चलता है। वाजपेयी जी के कार्यकाल की एक अहम घटना फरवरी 1999 में उनकी लाहौर बस यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान ‘लाहौर घोषणापत्र’ पर हस्ताक्षर किए गए थे जिसका मकसद परमाणु परीक्षणों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करना था।

राजनाथ सिंह जो वाजपेयी के साथ करीब से काम करने वाले बीजेपी के कुछ मौजूदा नेताओं में से एक हैं उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान उनका एक किस्सा सुनाया है। राजनाथ ने बताया कि पाकिस्तान की एक अविवाहित महिला वाजपेयी के भाषण से इतनी प्रभावित हुई कि उसने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया।

पाकिस्तानी महिला ने बाजपेई के सामने रखा शादी का प्रस्ताव

राजनाथ ने कहा कि वह महिला तोहफे के तौर पर कश्मीर चाहती थी। राजनाथ ने याद करते हुए कहा ‘पाकिस्तान यात्रा के दौरान एक महिला ने वाजपेयी से पूछा कि क्या आप मुझसे शादी करेंगे और बदले में कश्मीर देंगे?’ इसके बाद वाजपेयी की हाजिरजवाबी भी देखने को मिली। वाजपेयी ने उस महिला से कहा कि वह उससे शादी करने को तैयार हैं लेकिन दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए।

राजनाथ ने कहा ‘वाजपेयी का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का था।’ उनके इस जवाब से न सिर्फ उनके मजाकिया अंदाज का पता चलता है बल्कि यह भी दिखता है कि वे कूटनीति और हाजिरजवाबी के साथ-साथ कश्मीर के मुद्दे पर अपनी अडिग राय कैसे बनाए रखते थे।

लाहौर समझौते का पाकिस्तान ने किया था उल्लंघन

आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा 19 फरवरी 1999 को शुरू हुई एक ऐतिहासिक शांति पहल थी। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ‘सदा-ए-सरहद’ नामक उद्घाटन दिल्ली-लाहौर बस सेवा के जरिए वाघा बॉर्डर पार कर लाहौर पहुंचे थे जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उनका स्वागत किया था। पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए यह यात्रा की गई थी। इस बस में कपिल देव, देव आनंद, जावेद अख्तर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसी कई प्रसिद्ध भारतीय हस्तियां भी शामिल थीं।

इस पहल को दुनिया भर में सराहा गया लेकिन कुछ ही महीनों बाद कारगिल युद्ध छिड़ने से यह शांति प्रयास नाकाम हो गया। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ के आदेश पर पाकिस्तानी सेना कारगिल पर कब्जा कर लिया था जिसके बाद कारगिल को लेकर दोनों देशों के बीच जंग हुआ जिसमें भारत को जीत मिली थी।

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