माले: मालदीव ने गुरुवार को भारत को 150 मिलियन डॉलर का बकाया चुका दिया है। यह रकम 2019 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सुविधा के जरिए ली गई थी। 17 सितंबर को 50 मिलियन डॉलर की तीसरी और आखिरी किस्त चुका दी गई। इसके साथ ही पिछले दो सालों से भारत द्वारा लोन को बार-बार आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) का सिलसिला खत्म हो गया। हालांकि इससे मालदीव का मुद्रा भंडार काफी कम हो गया है, जो उसके लिए मुश्किल का सबब हो सकता है।
एसबीआई ट्रेजरी बिल (T-Bill) की मियाद इसी हफ्ते खत्म होने वाली थी। इससे पहले भारत ने भुगतान की समय-सीमा को आगे बढ़ाया था, जिससे माले को T-Bill चुकाने के लिए और समय मिल गया। यह लोन मूल रूप से 2019 में इब्राहिम सोलिह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को दिया गया था। यह लोन मालदीव के बजट में मदद के लिए एक आपातकालीन उपाय के तौर पर दिया गया था। इसकी मूल राशि 200 मिलियन डॉलर थी। मुइज्जू प्रशासन ने 2023 के अंत में सत्ता संभालने के बाद जनवरी 2024 में पहली किस्त चुकाई थी।
भारत ने 50 मिलियन डॉलर किए थे ‘माफ’
भारत ने घोषणा की थी कि कुल राशि में से 50 मिलियन डॉलर ग्रांट (अनुदान) के तौर पर दिए गए थे और उन्हें वापस करने की जरूरत नहीं है। इस तरह 100 मिलियन डॉलर का भुगतान बाकी रह गया था। इसे लेकर मुइज्जू प्रशासन को पिछले कुछ सालों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। भारत ने मई 2024 में 50 मिलियन डॉलर के T-Bill को पहली बार आगे बढ़ाया था, जबकि दूसरे बिल की समय-सीमा भी सितंबर 2024 में बढ़ाई गई थी।
मालदीव का मुद्रा भंडार
इस ताजा भुगतान से इस महीने मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार 600 मिलियन डॉलर से कम हो जाएगा, जिससे उसके पास डेढ़ महीने से कुछ अधिक समय का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। मालदीवियन मॉनेटरी अथॉरिटी (MMA) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के आखिर में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 643.8 मिलियन डॉलर था।
MMA के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में देश ने 36.7 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जिससे बड़े व्यापार घाटे का पता चलता है। इसका असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। मार्च 2026 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था लेकिन अगस्त में यह गिरकर 643.8 मिलियन डॉलर के मौजूदा स्तर पर आ गया।