इंटरव्यू, एग्जाम या पब्लिक स्पीकिंग से पहले क्यों तेज धड़कने लगता है दिल? जानें क्या है Situational Anxiety

कभी इंटरव्यू से ठीक पहले दिल तेजी से धड़कने लगता है, एग्जाम हॉल में पहुंचते ही हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं या पब्लिक स्पीकिंग से पहले ऐसा लगता है जैसे सांस तेज चल रही हो। ऐसी स्थिति में हर बार इसे किसी एंग्जायटी डिसऑर्डर का संकेत मानना जरूरी नहीं है। कई बार एंग्जायटी किसी खास स्थिती या इवेंट के सामने आने पर थोड़े समय के लिए बढ़ती है। इसे आम तौर पर सिचुएशन एंग्जायटी कहा जाता है। यह शरीर और दिमाग की स्ट्रेस रिस्पॉन्श का हिस्सा हो सकती है, लेकिन अगर ऐसी एंग्जायटी बार-बार होने लगे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करने लगे, तो प्रोफेशनल जांच जरूरी हो सकता है।

Situational Anxiety क्या है और यह कब होती है?

सिचुएशन एंग्जायटी उस स्थिति को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य टर्म है, जब किसी खास परिस्थिति के कारण व्यक्ति को अचानक डर, घबराहट, चिंता या बेचैनी महसूस होने लगे। जैसे इंटरव्यू, एग्जाम, प्रेजेंटेशन, पब्लिक स्पीकिंग पहली बार किसी से मिलने या किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले एंग्जायटी बढ़ना।

एनसीबीआई के अनुसार इसमें एंग्जायटी का ट्रिगर अक्सर स्पष्ट होता है और सिचुएशन खत्म होने के बाद लक्षण धीरे-धीरे कम हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को रोज सामान्य महसूस हो सकता है, लेकिन जैसे ही उसे स्टेज पर बोलने के लिए कहा जाए, उसका हार्ट रेट बढ़ने लगे और हथेलियों में पसीना होने लगे। हालांकि, सिचुएशन एंग्जायटी और सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

किसी खास Situation के सामने आते ही शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

एनसीबीआई के मुताबिक जब दिमाग किसी सिचुएशन यानी स्थिति को स्ट्रेसफुल या डर समझता है, तो शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स एक्टिवेट हो सकता है। इसमें सिम्पैथिटिक नर्वस सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर खुद को चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करने लगता है। इस दौरान हार्ट रेट बढ़ सकता है, सांस तेज हो सकती है, मसल्स में तनाव महसूस हो सकती है और पसीना बढ़ सकता है। कुछ लोगों को पेट में हलचल, हाथ कांपना, मुंह सूखना या चक्कर जैसा भी महसूस हो सकता है।

एनसीबीआई के अनुसार रिसर्च में एक्यूट मेंटल स्ट्रेस के दौरान हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, स्किन से जुड़ी समस्याएं और ब्रीदिंग जैसे साइकोलोजिकल बदलाव देखे गए हैं। यानी एंग्जायटी केवल दिमाग में महसूस होने वाली चीज नहीं है; इसका असर शरीर में भी दिखाई दे सकता है।

इंटरव्यू, एग्जाम या पब्लिक स्पीकिंग से पहले एग्जायटी क्यों बढ़ सकती है?

इंटरव्यू, एग्जाम या पब्लिक स्पीकिंग जैसी सिचुएशन में एक कॉमन फैक्टर होता है, मूल्यांकन (evaluation) का डर। व्यक्ति को लग सकता है कि दूसरे लोग उसके पर्फोमेंस को जज करेंगे या उसकी कोई गलती निगेटिव इम्प्रेशन पैदा कर सकती है।

एनआईएमएच के अनुसार सोशल एंग्जायटी में पब्लिक स्पीकिंग, जॉब इंटरव्यू और दूसरों के सामने परफोर्मेंस जैसी सिचुएशन एंग्जायटी को ट्रिगर कर सकती हैं। कुछ लोगों में एंग्जायटी मुख्य रूप से परफोर्मेंस सिचुएशन में ही दिखाई दे सकती है।

सिचुएशन एंग्जायटी में हार्ट रेट और ब्लोटिंग क्यों बदल जाते हैं?

एनसीबीआई के अनुसार एंग्जाटी के दौरान शरीर का फाइट और फ्लाइड रिस्पॉन्स एक्टिवेट हो सकता है। इसका उद्देश्य शरीर को तत्काल चैलेंस के लिए तैयार करना है। सिम्पैथिटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेशन के कारण हार्ट रेट और ब्रीदिंग रेट बढ़ सकते हैं। हार्ट तेजी से ब्लड सर्कुलेट करने की कोशिश करता है और सांसे तेज हो सकती है। इसी दौरान व्यक्ति को सीने में जकड़न, सांस पूरी न आने जैसा एहसास या हार्ट में भारीपन महसूस हो सकता है।

सिचुएशन एंग्जायटी को कैसे मैनेज किया जा सकता है?

  • पहले से तैयारी करें
  • सांसों को धीरे और नियंत्रित रखें
  • नकारात्मक विचारों को पहचानें
  • सिचुएशन से पूरी तरह बचने की आदत न बनाएं
  • स्लीप, एक्सरसाइज और डेली रूटीन पर ध्यान दें

सिचुएशन एंग्जायटी किसी खास सिचुएशन के सामने आने पर होने वाली अस्थाई एंग्जायटी हो सकती है। इंटरव्यू, एंग्जाम और पब्लिक स्पीकिंग जैसी सिचुएशन में मूल्याकंन का डर शरीर के स्ट्रेस रिस्पॉन्स को एक्टिवेट कर सकता है, जिससे हार्ट रेट और ब्रीदिंग बढ़ना, अधिक पसीना आना, कंपकंपी होना और एकाग्रता में परेशानी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। अगर इन समस्याओं की वजह से रोजाना की लाइफस्टाइल प्रभावित हो रही है तो ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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