पेशाब में बदलाव को अक्सर लोग यूटीआई, पानी की कमी या किसी सामान्य समस्या से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कभी-कभी यूरिन में दिखाई देने वाले छोटे संकेत ब्लैडर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ यूरिन टेस्ट डॉक्टरों को ऐसे संकेत पहचानने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर सामान्य यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर की पुष्टि हो सकती है।
क्या साधारण यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर का पता लगाया जा सकता है?
कुछ हद तक हां। यूरिन टेस्ट ब्लैडर कैंसर के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है। सबसे सामान्य जांचों में यूरिनलाइसिस, यूरिन साइटोलॉजी और कुछ मामलों में यूरिन ट्यूमर मार्कर टेस्ट शामिल हैं। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक यूरिनलाइसिस (Urinalysis) में पेशाब में रेड ब्लड सेल्स यानी खून की मौजूदगी देखी जा सकती है, जबकि यूरिन साइटोलॉजी यूरिन के अंदर मौजूद असामान्य सेल्स की जांच की जाती है। कुछ स्पेशिलाइज टेस्ट यूरिन में ऐसे तत्व या मार्कर तलाशते हैं जो ब्लेैडर कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।
यूरिन में ऐसे कौन से संकेत मिल सकते हैं जो ब्लैडर कैंसर की ओर इशारा करें?
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक इसके अलावा कुछ लोगों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार यूरिन आने की इच्छा, पेशाब जाने की तीव्र इच्छा या रात में बार-बार पेशाब जाने जैसे यूरिनरी लक्षण भी हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण केवल कैंसर में नहीं होते। यूटीआई, किडनी स्टोन, और दूसरी यूरिनरी कंडिशन भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।
Urine Cytology में डॉक्टर यह देखते हैं कि यूरिन में ब्लैडर की लाइनिंग से निकले सेल्स सामान्य हैं या उनमें कैंसर जैसे असामान्य बदलाव दिखाई दे रहे हैं। यह टेस्ट खास तौर पर कुछ प्रकार के ब्लैडर कैंसर की पहचान में मदद कर सकता है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं।
हेमटूरिया यानी पेशाब में खून ब्लैडर कैंसर का शुरुआती संकेत क्यों माना जाता है?
ध्यान रखें कि हर Hematuria का मतलब ब्लैडर कैंसर नहीं होता। यूटीआई, किडनी या ब्लैडर स्टोन, प्रोस्टेट की समस्या, किडनी रोग, कुछ दवाएं और कई दूसरी कंडिशन्स भी यूरिन में ब्लड का कारण बन सकती हैं।
किन लोगों में ब्लैडर कैंसर स्क्रिनिंग या जांच की जरूरत ज्यादा हो सकती है?
एनआईएच के अनुसार ब्लैडर कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में स्मोकिंग, बढ़ती उम्र और कुछ कैमिकल एक्सपोजर वाले व्यवसाय शामिल हैं। रबड़, कैमिकल और लेदर इंडस्ट्री में कुछ कैंसर पैदा करने वाले कैमिकल के संपर्क को भी जोखिम कारक माना गया है। इसके अलावा परिवार में किसी को ब्लैडर कैंसर हुआ हो तो भी इस जांच को कराना जरूरी हो सकता है।
साधारण यूरिन टेस्ट ब्लैडर कैंसर की पहचान की दिशा में एक आसान शुरुआती संकेत दे सकता है, खासकर जब यूरिन ब्लड या असामान्य सेल मिलें। लेकिन हर यूरिन टेस्ट कैंसर की पहचान नहीं करता और नॉर्मल रिपोर्ट भी हर स्थिति में कैंसर को पूरी तरह नहीं बता पाती है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर यूरिन साइटोलॉजी, ट्यूमर मार्कर टेस्ट, इमेजिंग और सिस्टोस्कोपी जैसी जांचों के जरिए कैंसर की पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।