केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को जलवायु संकट के लिए यूरोप को बड़ा जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की 17% आबादी है लेकिन कार्बन उत्सर्ज में योगदान 3% से भी कम है।
गोयल ने जर्मनी में बर्लिन ग्लोबल डायलॉग कार्यक्रम में कहा कि भारत की तुलना में यूरोप का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 7 से 8 गुना ज्यादा है।
गोयल ने कहा,
इस पूरी गड़बड़ी के लिए सबसे पहले कौन जिम्मेदार है? ओजोन परत को नुकसान कहां से पहुंचा? किसने वातावरण में इतना सारा कार्बन छोड़ा?
मंत्री ने कहा कि भारत को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ 1.4 अरब लोगों की जरूरतें भी पूरी करनी हैं।
‘आर्थिक मदद का वादा, लेकिन 11 साल बाद भी कुछ नहीं मिला’
गोयल ने कहा कि जलवायु संकट से निपटने की जिम्मेदारी उन देशों की ज्यादा होनी चाहिए, जिन्होंने दशकों तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके आर्थिक विकास किया और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने 2015 में हुए पेरिस जलवायु सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विकसित देशों ने विकासशील और कम विकसित देशों की मदद करने पर सहमति जताई थी।
इसमें प्रशांत महासागर और कैरेबियन क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देश भी शामिल थे, जो जलवायु परिवर्तन के खतरे से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
गोयल के मुताबिक, विकसित देशों ने हर साल 100 अरब डॉलर यानी करीब 9 लाख करोड़ रुपए की आर्थिक मदद देने का वादा किया था। उन्होंने कहा,
विकसित देशों ने वादे को पूरा नहीं किया। 11 साल बाद भी हमें इस रकम का एक पैसा तक नहीं मिला। ये सिर्फ वादे हैं।
भारत हवा-सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में तीसरे नंबर पर
गोयल ने कहा कि भारत संसाधनों की बर्बादी रोकने और चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने पर जोर दे रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश का स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले कार्यक्रमों में शामिल है।
ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखने वाली संस्था एंबर के मुताबिक, 2024 में भारत हवा और सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के मामले में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया था।
वहीं, 2025 में भारत में नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। सौर, पवन, जलविद्युत और जैव ऊर्जा से बिजली उत्पादन कुल 98 टेरावाट-घंटे बढ़ा।
फैक्ट चेक- 2023 में दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी करीब 7.8% थी। वहीं, प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के मामले में यूरोपीय यूरोपीय यूनियन भारत से आगे है। वहां हर व्यक्ति सालाना औसतन 7.2 टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 2.9 टन है। यानी यूरोपीय संघ में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन भारत से करीब ढाई गुना ज्यादा है।