मॉस्को/बीजिंग: भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग जा रहे हैं। वे भारत और चीन के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स के बीच सीमा विवाद पर बातचीत के 25वें दौर में हिस्सा लेंगे। यह बातचीत नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) समिट के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से ठीक पहले हो रही है। हालांकि शी जिनपिंग के दौरे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि वे इसमें शामिल होंगे। इससे शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का मौका भी मिल सकता है।
दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय आर्थिक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर गहन चर्चा की है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक जयशंकर की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी एक अहम मुलाकात संभव है।
मास्को से बीजिंग तक भारत की कूटनीतिक हलचल
रिपोर्ट के मुताबिक सीमा वार्ता के लिए भारत के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव अजीत डोभाल मंगलवार को अपने चीनी समकक्ष, पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे। लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के अलावा, इस बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों, रिश्तों को स्थिर करने की दोनों पक्षों की कोशिशों और अगले महीने शी जिनपिंग के भारत दौरे की संभावना पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
अजीत डोवाल की बीजिंग यात्रा से ठीक पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर भारत का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता ही चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की प्राथमिक शर्त है। साल 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आया था जिसे बीते कुछ महीनों में कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत से पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।
सितंबर में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन पर टिकीं निगाहें
भारत इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसका आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। इस बात की मजबूत संभावना जताई जा रही है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली आएंगे। अगर ऐसा होता है तो पिछले सात सालों में शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा होगा।
ब्रिक्स से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अलग द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है जिसके लिए अजीत डोवाल की मौजूदा बीजिंग यात्रा जमीन तैयार कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के आने वाले दिनों में मध्य एशिया दौरे और नई दिल्ली में पुतिन-जिनपिंग की संभावित मौजूदगी का मतलब है कि भारत पश्चिमी देशों और पूर्वी ब्लॉक के बीच एक मजबूत संतुलन बनाकर चल रहा है।