अमेजन में ₹46 लाख की जॉब, एयरबस में सिलेक्शन, 7 बार फेल होने वाले लड़के ने क्‍यों चुनी सेना की वर्दी?

सुल्तानपुर: जिसका उद्देश्य अडिग हो, उसे असफलताएं रोक नहीं सकतीं- इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है यूपी के सुल्तानपुर में पीपरगांव के रहने वाले सीनियर अंडर ऑफिसर शार्देन्दु तिवारी ने। अमेजन में क्लाउड इंजीनियर के पद पर ₹46 लाख के पैकेज और एयरबस में चयन जैसी शानदार कॉर्पोरेट सफलता को पीछे छोड़कर शार्देन्दु 5 सितंबर को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया से पास आउट होकर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे।

पीपरगांव धनपतगंज थानाक्षेत्र में पड़ता है। दूसरी पीढ़ी के सैनिक शार्देन्दु को सेना में जाने का जज्बा अपने पिता से विरासत में मिला। उनके पिता ने आर्मी सर्विस कोर (ASC) में 36 वर्षों तक देश की सेवा की और मानद कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। सैन्य माहौल में पले-बढ़े शार्देन्दु के मन में बचपन से ही अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनने की तीव्र इच्छा थी।

उच्च शिक्षा और कॉर्पोरेट में बुलंदियां

शार्देन्दु ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, चंडीमंदिर छावनी (पंचकूला) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ से आईटी में बीई और कंप्यूटर साइंस एवं इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में एमटेक की डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा के बाद उन्हें अमेजन में ₹46 लाख वार्षिक पैकेज पर क्लाउड इंजीनियर बनने का मौका मिला, जिसके बाद उनका चयन दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी एयरबस में भी हुआ। हालांकि, कॉर्पोरेट जगत का यह आकर्षक वेतनमान भी उनके सेना में शामिल होने के जुनून के आगे फीका साबित हुआ।

आठवें प्रयास में मिली कामयाबी

सेना में अधिकारी बनने की राह शार्देन्दु के लिए आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में लगातार मिली असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार, अपने 8वें प्रयास में उन्होंने टेक्निकल एंट्री के जरिए सफलता हासिल की। यह प्रवेश उनके लिए तकनीक और राष्ट्रसेवा—दोनों को एक साथ जीने का बेहतरीन अवसर लेकर आया।

प्रशिक्षण के दौरान अपनी लगन, कड़े अनुशासन और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के बल पर उन्होंने OTA गया में ‘सीनियर अंडर ऑफिसर’ का प्रतिष्ठित पद हासिल किया। पढ़ाई और सैन्य अभ्यास के अलावा शार्देन्दु बास्केटबॉल और टेबल टेनिस के भी कुशल खिलाड़ी हैं। 5 सितंबर को OTA गया के परेड ग्राउंड पर जब शार्देन्दु तिवारी ‘अंतिम पग’ पार करेंगे, तो यह न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे सुल्तानपुर के लिए गर्व का क्षण होगा। उनकी यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से हर असफलता को विजय में बदला जा सकता है।
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