उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना ने शुक्रवार को एक और बड़ा पड़ाव पार कर लिया। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत टिहरी जिले के ढालवाला में बन रही पहली एस्केप टनल का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया। यानी सुरंग के दोनों छोर आखिरकार आपस में जुड़ गए। इस ब्रेकथ्रू के साथ ही 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 पूरी तरह आर-पार हो गई है। यह देश की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सबसे बड़ी खासियत और चुनौती इसकी सुरंगें हैं। पूरी परियोजना में कुल 28 सुरंगों का निर्माण किया जाना है। अधिकारियों के मुताबिक इनमें से 22 सुरंगों का काम पूरा हो चुका है। यानी परियोजना की कुल 28 सुरंगों में से करीब 78 फीसदी सुरंगें पूरी हो चुकी हैं। ढालवाला की एस्केप टनल का ब्रेकथ्रू इसी सिलसिले में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) इस परियोजना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल कनेक्टिविटी देना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग के रास्ते में बेहद कमजोर चट्टानी क्षेत्र और मायलोनाइट जोन भी मिले। इसकी एक बड़ी वजह सुरंग का मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) के करीब होना है।
125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सिर्फ एक नया परिवहन साधन नहीं होगी। इससे सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने, यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने और पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिल सकती है। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने का असर स्थानीय लोगों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों पर भी पड़ने की उम्मीद है। उत्तराखंड के चारधाम और अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के कटरा-बनिहाल रेलखंड में सुरंग-49 खारी और बनिहाल स्टेशनों के बीच बनी है। इसकी लंबाई 12.895 किलोमीटर है और यह भारतीय रेलवे की सबसे लंबी सुरंग है। बनिहाल से खारी और संगलदान के बीच का पूरा रेलखंड आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है। इस इलाके में रेल लाइन का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा सुरंगों के अंदर से गुजरता है। इस खंड में कई महत्वपूर्ण सुरंगें बनाई गई हैं, जो पहाड़ी क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।