47 साल पहले बारिश में फिल्माया अमिताभ का रोमांटिक गाना, साड़ी का रंग बदन पर छप गया, फिल्म बनने में लगे 8 साल

इमोशंस, प्यार और मन में छिपी भावनाओं को जताने के लिए फिल्मों से अधिक खूबसूरत जरिया शायद कोई नहीं। बारिश को अक्सर रोमांस, मिठास और सुकून के साथ लोग जोड़ते हैं। कई फिल्मों में बारिश का मौसम और उससे जुड़े गाने रोमांस और तड़प जैसी भावनाओं को बरसात की बूंदों के साथ कुछ इस तरह फिल्माया गया है जो लोगों की धड़कनों में बस गई है। ऐसे तो बारिश के कुछ बेहतरीन और सदाबहार गानों की लंबी लिस्ट है, जिसकी लाइनें रोमांचित करती हैं। आज हम यहां बात कर रहे हैं अमिताभ बच्चन की 47 साल पुरानी फिल्म के उस गाने की जो बरसात की बूंदों के साथ अक्सर लोग गुनगुनाने लगते हैं। इस गाने के पीछे की कहानी भी उतनी ही मजेदार है।

बारिश की बूंदें अपने आपमें एक मधुर लय मानी जाती है और जब संगीत की धुनें इससे जोड़ दी जाए तो ये दिलों को छू जाते हैं। यही वजह है कि अक्सर फिल्मों में रोमांस दिखाने के लिए मेकर्स बारिश का सहारा लेते हैं। एक ऐसा ही रोमांटिक गाना है, जिसे 47 साल पहले अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया था। जैसे ही बरसात आती है, अनायास ही लोग इस गाने को गुनगुनाने लगते हैं।

इस गाने को असली बारिश के साथ शूट किया गया था

इस गाने में अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी मुंबई के मरीन ड्राइव पर बारिश में रोमांटिक होते नजर आ रहे हैं। मजेदार ये है कि जहां बाकी गानों को फिल्माने के लिए अक्सर मेकर्स नकली बारिश कराया करते हैं, वहीं इस गाने को असली बारिश के साथ शूट किया गया था।

‘रिमझिम गिरे सावन’ की शूटिंग का किस्सा दिलचस्प

साल 1979 में आई फिल्म ‘मंजिल’ का ये गाना ‘रिमझिम गिरे सावन’ की शूटिंग का किस्सा दिलचस्प है। फिल्म के इस गाने की शूटिंग के बारे में बातें करते हुए कपिल शर्मा के शो पर एक्ट्रेस ने पूरी कहानी सुनाई थी। उन्होंने कहा, ‘मुंबई में सचमुच बारिश थी। बासु चटर्जी की पिक्चर थी मुझे आज भी याद है। अभी तो वॉटरप्रूफ आईलाइनर निकला है, तभी नहीं था। एक शॉट के बाद देखती हूं हीरो भी हंस रहा है बाकी लोग भी हंस रहे हैं। इधर काली, इधर की लाली सब एक।’

‘साड़ी पर जो प्रिंट थे वो पूरे बदन पर छप गए थे’

मौसमी चटर्जी ने इस गाने के शूट का किस्सा आगे सुनाते हुए बताया, ‘फिर जाओ और एक जगह पर बैठकर सुखाओ। ऊपर से घर जाने के बाद मैंने साड़ी पहनी थी ग्रीन कलर की फ्लावर वाला शिफॉन टाइप साड़ी, सारे जो साड़ी पर प्रिंट थे वो पूरे बदन पर छप गए थे। इतनी बारिश थी कि हमें गाना सुनाई ही नहीं देता है, हमें दूर से रूमाल दिखाया जाता और लगता गाना स्टार्ट हो गया। फिर जब दोबारा रुमाल दो बार घुमाते मतलब स्टॉप यानी कट। एक गाड़ी आएगी, आप दोनों बैठ जाओ और वो भी गीला-गीला। बैठते ही फिर एक होटेल में उतरते, वहां एक होटल था। वहां कटिंग चाय होती थी, उधर एक-एक सिप पी लो और फिर लोकेशन पर पहुंचो। मैंने कोई विग विग नहीं पहना था, वो मैंने आज तक नहीं पहना था। नहीं तो, वो मेरे हाथ में ही आ जाता।’

मौसमी चटर्जी बोलीं- मुंबई की बारिश मुझे अच्छी नहीं लगती

मौसमी चटर्जी ने ये भी कहा था, ‘मुंबई की बारिश मुझे अच्छी नहीं लगती क्योंकि दो घंटे में सब फुस्स हो जाता है। ट्रेन बंद हो जाता है, बस बंद हो जाता हैस खाना पकाने वाली, काम करने वाली सब बंद हो जाती है। फिर हमें ही करना पड़ता है और फिर हिरोइन से वही बन जाते हैं।’

इस फिल्म को बनाने में 8 साल लग गए, गाना चार्टबस्टर बन गया

यहां बताते चलें कि अमिता और मौसनी की फिल्म ‘मंजिल’ 1979 में बनी एक भारतीय हिंदी भाषा की रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन बसु चटर्जी ने किया है। यह फिल्म 1965 की बंगाली फिल्म आकाश कुसुम की रीमेक थी। बताया जाता है कि इस फिल्म की शूटिंग 1972 से लेकर 1979 के बीच रुक-रुक कर हुई, यानी इसे बनाने में 8 साल लग गए। आखिरकार जब फिल्म रिलीज हुई तो इसे क्रिटिक्स से तारीफें मिली और ये गाना ‘रिमझिम गिरे सावन’ एक चार्टबस्टर बन गया था। इस गाने में किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज है जो बारिश में फिल्माया सदाबहार पसंदीदा गीत बन चुका है।

Spread the love