बारिश और अंधेरे को मात देकर स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर पहुंचाया आयुष्मान का सुरक्षा कवच

सुकमा। कोंटा विकासखंड के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कामापेदागुड़ा में गुरुवार की रात ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने जनसेवा की नई मिसाल कायम कर दी। घनघोर अंधेरा, लगातार हो रही बारिश और बिजली गुल होने जैसी कठिन परिस्थितियां भी स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियों का हौसला नहीं डिगा सकीं। टॉर्च और मोबाइल की मद्धम रोशनी के सहारे टीम घर-घर पहुंची और ग्रामीणों के लिए आयुष्मान भारत एवं वय वंदन योजना के कार्ड बनाकर यह संदेश दिया कि सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

    इसी समर्पण का परिणाम रहा कि एक ही रात में गांव के 15 पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड तथा 2 वय वंदन योजना के कार्ड तैयार किए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने हर उस परिवार तक दस्तक दी, जहां बीमारी के साथ इलाज के खर्च की चिंता भी वर्षों से बोझ बनी हुई थी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अधिकारियों और मैदानी अमले की प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील प्रशासन केवल योजनाएं नहीं बनाता, बल्कि जरूरतमंदों के द्वार तक पहुंचकर उनका भरोसा भी जीतता है।

     आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने वाली हितग्राही संध्या पंडो ने भावुक होकर कहा कि रात के अंधेरे में घर पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका आयुष्मान कार्ड बनाया, जिससे अब परिवार को इलाज के भारी खर्च की चिंता नहीं रहेगी। उनके लिए यह कार्ड सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में सुरक्षा का भरोसा है। ऐसी अनेक मुस्कानें इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता बनकर सामने आई हैं, जहां सरकारी पहल ने लोगों के जीवन में राहत और विश्वास दोनों पहुंचाए हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का प्रभाव अब सुकमा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जिले में 2,51,722 पात्र हितग्राहियों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 2,04,944 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि शेष 46,767 पात्र हितग्राहियों को भी शीघ्र स्वास्थ्य सुरक्षा कवच से जोड़ने के लिए विशेष अभियान लगातार जारी है। कामापेदागुड़ा की यह प्रेरक घटना बताती है कि जब प्रशासन की मंशा मजबूत और कर्मचारियों का समर्पण अटूट हो, तब अंधेरा, बारिश और दूरियां भी जनसेवा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।

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