नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 96.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। तेल महंगा होने का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। अमेरिका में डीजल की कीमत ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुकी हैं। इस बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ टकराव खत्म होने के बाद तेल की कीमतें गिरकर $40 प्रति बैरल तक आ सकती हैं। इससे बॉन्ड यील्ड भी नीचे आएगी, जो हाल ही में कई साल के रेकॉर्ड पर है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बेसेंट ने एक इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा, ‘हम ईरान के साथ इस टकराव से बाहर निकल आएंगे और मुझे उम्मीद है कि तेल की कीमतें कम होंगी। इसके बाद तेल बाजार में बहुत ज्यादा सप्लाई होगी। हो सकता है कि हम कच्चा तेल $50 या $40 पर देखें, क्योंकि बहुत सारा तेल बाजार में आ रहा है।’
महंगाई की चिंता
हालांकि बेसेंट ने ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई। इसके जल्द खत्म होने के आसार कम ही दिख रहे हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के कारण ब्रेंट क्रूड $95 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया जो जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
तेल की ऊंची कीमत के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इससे दुनिया भर में बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड में उछाल आया है। इस हफ्ते 10 साल के यूएस बॉन्ड की दरें 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बेसेंट ने कहा, ‘ब्याज दरों का तेल की कीमतों के साथ अब तक का सबसे ज्यादा कोरिलेशन देखा जा रहा है। ईरान का टकराव खत्म होगा, तो ब्याज दरें और महंगाई कम हो जाएंगी।’
भारत का फायदा
अगर कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आती है तो भारत को इसका बड़ा फायदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। हाल में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 100 डॉलर के करीब पहुंच गई। जुलाई में भारत का कच्चे तेल के आयात का बिल 41 फीसदी बढ़कर 13.7 अरब डॉलर पहुंच गई।