भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय(आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट(यूटीडी) में बीटेक चतुर्थ सेमेस्टर के नौ सीलबंद प्रश्नपत्रों के लिफाफे चोरी होने के मामले की जांच कई दिन बाद भी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।पुलिस और विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति समानांतर रूप से मामले की पड़ताल कर रही हैं, लेकिन अब तक न तो चोरी करने वाले का पता चल सका है और न ही प्रश्नपत्रों का सुराग मिला है।
सीसीटीवी में नहीं दिखा कोई बाहरी, गोपनीय रूम में भी नहीं थे कैमरे; मिलीभगत की आशंका
जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे मामले में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।
गांधी नगर पुलिस अधिकारियों के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच में कोई बाहरी व्यक्ति संदिग्ध रूप से प्रवेश करता दिखाई नहीं दिया। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय के भीतर से ही गायब किए गए।
हालांकि पुलिस ने यह भी संभावना व्यक्त की है कि विश्वविद्यालय के पीछे की टूटी हुई दीवार का इस्तेमाल कर कोई अंदर आया हो सकता है।
परीक्षा शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय किन-किन लोगों के बीच संपर्क था और उनकी लोकेशन कहां थी। जिन विषयों के प्रश्नपत्र चोरी हुए, उन परीक्षार्थियों की भूमिका की भी जांच से इनकार नहीं किया गया है।
पुलिस का कहना है कि जांच में यह भी सामने आया है कि जिस कक्ष में गोपनीय प्रश्नपत्र रखे गए थे, वहां सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगाए गए थे। इसके कारण यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि घटना के समय कमरे में कौन आया और कौन बाहर गया।
पुलिस ने सुरक्षा गार्ड के बयान पर भी सवाल उठाए हैं। गार्ड ने एक साथ तीन स्थानों पर ड्यूटी होने की बात कही है, जिसकी सत्यता की जांच की जा रही है।
तत्कालीन परीक्षा प्रभारी डॉ. अर्चना तिवारी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने अपने स्तर पर घटना के समय की लोकेशन और काल डिटेल की जांच कराने के लिए पुलिस को सूची भी सौंपी है।
उन्होंने आशंका जताई कि विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरी साजिश रची गई हो सकती है। उनका आरोप है कि कई विभागों का प्रभार उनके पास होने से कुछ लोग असंतुष्ट थे और उन्हें परीक्षा नियंत्रक के पद से हटाने के उद्देश्य से इस घटना को अंजाम दिया गया