नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के कट्टर विरोधी पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा पहली बार उनकी सरकार के समर्थन में कूद पड़े हैं। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को पूरी तरह से सफल बताया है और वो चीजें गिनाई हैं, जिसकी वजह से भारत का दुनिया भर में प्रभाव बढ़ा है।
पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा पिछले करीब एक दशक से पीएम मोदी और उनकी सरकार की नीतियों के सबसे बड़े आलोचकों में शामिल रहे हैं। लेकिन, रविवार को झारखंड के हजारीबाग में उनसे न्यूज एजेंसी एएनआई ने जब भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर प्रतिक्रिया मांगी, तो वह इसकी सफलताएं गिनाने लग गए। हालांकि, चीन को लेकर उनका कहना है कि उसपर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता।
ब्रिक्स समिट की सफलता के समर्थन में यशवंत सिन्हा
यशवंत सिन्हा ने कहा है कि ‘इसे सफल (ब्रिक्स समिट) माना चाना चाहिए, क्योंकि इसमें जितने भी राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण दिया गया था, वे सभी आए…दूसरी सफलता ये रही कि बैठक के बाद एक ज्वाइंट डिक्लेरेशन जारी हुआ।’
ब्रिक्स समिट में भारत की भूमिका की जमकर तारीफ
पूर्व विदेश और वित्त मंत्री का कहना है कि ‘जब पिछले मई में दिल्ली में विदेश मंत्री मिले थे, तब आपसी मतभेदों की वजह से कोई ज्वाइंट डिक्लेरेशन नहीं जारी हो पाया था। लेकिन, इस बार लगता है कि अधिकारी ने बहुत ही कड़ी मेहनत की है और आखिकार सर्वसम्मति से एक साझा घोषणापत्र जारी किया गया….।’ उन्होंने सभी तरह की द्विपक्षीय बैठकों में भी भारत की भूमिका की जमकर सराहना की और चीन और पश्चिम एशिया में इसके रोल का जिक्र किया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता पर जताया संतोष
- उन्होंने कहा कि जब ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने हमला किया था, तो कहीं न कहीं भारत अलग-थलग नजर आया था।
- उन्होंने ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों में उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के दौरान पैदा हुई कूटनीतिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया।
- उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत एक बार फिर से अपने परंपरागत स्टैंड पर लौटता हुआ नजर आ रहा है, जो कि संतोष की बात है।
- हालांकि, उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि चीन ने पीठ में खंजर भोंके हैं, इसलिए उसपर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता।
- उन्होंने कहा कि बातचीत होती रहनी चाहिए, लेकिन उसपर भरोसा करना मुश्किल है।
- उन्होंने ये भी कहा है कि शायद द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भारत-चीन के बीच कुछ तलखी भी पैदा हुई और शायद यही वजह है कि डिनर के लिए शी जिनपिंग नहीं आए।
यशवंत सिन्हा कैसे बन गए पीएम मोदी के आलोचक
- यशवंत सिन्हा बीजेपी में रहते हुए बीजेपी और मोदी सरकार के बहुत बड़े आलोचक बन गए थे। 2017 से उन्होंने खुलकर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
- 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले तो उन्होंने लोकतंत्र खतरे में की आवाज उठाते हुए बीजेपी तक छोड़ दी।
- राफेल डील के खिलाफ उन्होंने अरुण शौरी और प्रशांत भूषण से हाथ मिला लिया और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए।
- बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में भी अपनी सियासी संभावनाएं तलाशीं और 2022 में राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार तक बन। लेकिन, राजनीतिक मोर्चे पर वह लगातार साइडलाइन होते चले गए।