बीजिंग: चीन ने साल 2021 में ऐसा कारनामा कर दिखाया जो आज पूरी दुनिया के लिए प्लास्टकि कचरे से निपटने की राह दिखा रहा है। उसी साल ईस्ट चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एक सड़क प्रोजेक्ट में 6000 से ज्यादा बोतलों और दूसरे प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया गया। यह दुनिया की पहली प्लास्टिक रोड थी। अर्थ डे पर शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को डाउ (Dow) और डेयरी ब्रांड शाइनी मीडो (Shiny Meadow) ने मिलकर तैयार किया था, ताकि प्लास्टिक की समस्या के निपटा जा सके।
इस प्रोजेक्ट के तहत शंघाई में इस्तेमाल की गई हजारों दूध की बोतलों को एक नई जिंदगी मिली। कचरा बनने के बजाय इन बोतलों को सड़क बनाने के काम में लाया गया। इससे उस प्लास्टिक के लिए एक रास्ता खुला, जिसकी पारंपरिक रीसाइक्लिंग में बहुत कम कीमत थी।
डाउ ने प्लास्टर कचरे का क्या निकाला हल?
डाउ ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया है उसके तहत प्लास्टिक को इकठ्ठा करके उसे पॉलीमर-मॉडिफाइड डामर के लिए पोस्ट-कंज्यूमर रीसाइकल्ड प्लास्टिक में बदल दिया जाता है। फिर इस रीसाइकल्ड मटीरियल को सड़क बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया। इससे हजारों बेकार बोतलें सड़क का हिस्सा बन गईं। इस प्रोजेक्ट में कुल 6000 से ज्यादा इस्तेमाल की गई दूध की बोतलें और दूसरे प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया गया।
भारत में भी प्लास्टिक रीसाइकलिंग पर काम
शंघाई प्रोजेक्ट पूरे एशिया में डाउ के सड़कों पर रीसाइकिल प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर बड़े काम का हिस्सा था। कंपनी बताया कि उसने 2017 में इंडोनेशिया के डेपोक शहर में रीसाइकिल प्लास्टिक के सड़कों को बेहतर बनाना शुरू किया था। बाद में उसने भारत में पुणे और बैंगलुरु की सड़कों पर भी पार्टनर्स के साथ काम किया।