जेल से अपराध चलाने पर लगेगी लगाम! पैरामिलिट्री फोर्स के अफसर बनेंगे जेलर, जम्मू-कश्मीर से शुरुआत

नई दिल्लीः देश की जेलों में बंद आतंकवादियों और खूंखार गैंगस्टरों के जेल के अंदर और बाहर चलने वाले नेटवर्क को तोड़ने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है। इसके तहत जेलर यानी जेल अधीक्षक के पदों पर राज्य या जेल कैडर के अधिकारियों के बजाय पैरामिलिट्री फोर्स के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात करने की योजना है।

इसकी शुरुआत जम्मू-कश्मीर की जेलों से किए जाने की संभावना है। यहां CISF के अधिकारियों को जेल अधीक्षक बनाने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल और दूसरे राज्यों की उन जेलों में भी यह व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा सकता है, जहां आतंकवादियों और गंभीर अपराधों के आरोपियों की संख्या अधिक है।

अभी जेलों में ऐसी है व्यवस्था

फिलहाल देश की जेलों में जेल के DG के तौर पर आईपीएस की नियुक्ति की जाती है। कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अन्य वरिष्ठ पदों पर भी पुलिस सेवा के अधिकारी तैनात किए जाते हैं। दिल्ली की तिहाड़ जेल में जेल अधीक्षक के पदों पर आमतौर पर दानिक्स अधिकारियों को लगाया जाता है, जबकि जेल कैडर के अधिकारी उनके अधीन काम करते हैं।

जेल से अपराध चलाने पर लगेगी लगाम

सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर की सात जेलों की सुरक्षा CISF के पास है। अब संवेदनशील कैदियों को देखते हुए जेल प्रशासन में भी उसके अधिकारियों की भूमिका बढ़ाने पर विचार हो रहा है। इसका मकसद जेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सांठगांठ रोकना है।

पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क की आशंका

जम्मू-कश्मीर में इस व्यवस्था को खास अहमियत दी जा रही है। कुछ कैदियों के पाक हैंडलरों के संपर्क में रहने और जेल के भीतर से अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने की आशंका रही है। हाल में पुलिस ने जेल के अंदर से कथित तौर पर अलगाववादी एजेंडा चलाने वाले एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। आरोप था कि यह नेटवर्क घाटी में सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर्स के जरिए गतिविधियां चला रहा था। मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

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