दिल की हर धड़कन के पीछे छिपा है Electrical Signal, जानें कैसे काम करता है हार्ट का सिस्टम

हृदय हर मिनट लगातार धड़कता रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर बार कॉन्टैक्शन और फिर रिलैक्स होने का सिग्नल कहां से मिलता है? हृदय को सिर्फ एक मांसपेशी समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसकी हर धड़कन के पीछे एक बेहद व्यवस्थित इलेक्ट्रिकल सिस्टम काम करता है, जो तय करता है कि हृदय के अलग-अलग हिस्से और किस क्रम में क्रॉन्टैक्ट करेंगे। इस विद्युत प्रणाली में कुछ विशेष कोशिकाएं अपने आप विद्युत आवेग (Electrical Impulses) बना सकते हैं। ये संकेत पहले हृदय के ऊपरी कक्षों (चेम्बर) यानी अटरिया (Atria) को सक्रिय करते हैं और फिर एक नियंत्रित रास्ते से नीचे वेंट्रिकल्स (Ventricles) तक पहुंचते हैं। यह पूरी प्रक्रिया हृदय कक्षों (चेम्बर्स) को एक समन्वित तरीके से कॉन्ट्रैक्ट करते हैं और रक्त को फेफड़ों और पूरे शरीर तक पंप करते हैं।

हृदय केवल मांसपेशी नहीं, एक इलेक्ट्रिक ऑर्गन भी है?

जॉन्स हॉपकिन्स के अनुसार हृदय का मुख्य काम रक्त को पंप करना है और इसके लिए हृदय की मांसपेशियों यानी मायोकार्डियम का बार-बार सिकुड़ना और रिलैक्स होना जरूरी है। लेकिन, हृदय की मांसपेशी कोशिकाएं खुद से हर बार एक साथ सिकुड़ नहीं सकतीं। उन्हें इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन की जरूरत होती है। इसी काम के लिए हृदय में विशिष्ट कोशिकाओं और टिशू का एक कार्डियक कंडक्शन सिस्टम मौजूद होता है। यह प्रणाली विद्युत आवेग (Electrical Impulse) उत्पन्न और संचालित करती है, जिससे हृदय कक्ष (Heart Chambers) एक निश्चित क्रम में सक्रिय होते हैं।

क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार सामान्य Heart Rhythm में पहला इलेक्ट्रिकल इम्पल्स आमतौर पर सिनोट्रियल नोड यानी एसए नोड में बनता है। यह दाहिने आलिंद (Right Atrium) की ऊपरी दीवार में, सुपीरियर वेना कावा (Superior Vena Cava) के प्रवेश के पास स्थित विशेषीकृत टिशू है।

एसए नोड की खासियत यह है कि इसकी पेसमेकर कोशिकाएं बिना किसी बाहरी विद्युत संकेत (Electrical Signal) के नियमित रूप से विध्रुवित (Depolarize) हो सकती हैं। इसी ओटोमैटिक एक्टिविटी से हार्ट बीट की शुरुआत होती है।

जब एसए नोड इलेक्ट्रिकल इंपल्स बनता है, तो यह सिग्नल एट्रियल मसल में फैलता है। इससे दाएं और बाएं आलिंद सिकुड़ (Left Atrium Contract) जाते हैं और रक्त निलयों (Ventricles) की ओर मुड़ जाता है।

SA Node को हार्ट का नेचुरल पेसमेकर क्यों कहा जाता है?

एनसीबीआई के अनुसार एसए नोड को नेचुरल पेसमेकर इसलिए कहा जाता है क्योंकि सामान्य स्थिति में यह हार्ट के इलेक्ट्रिकल रिदम को निर्धारित करने वाला प्राइमरी पेसमेकर होता है।

हार्ट के दूसरे हिस्सों में भी कुछ सेल्स अपने आप इलेक्ट्रिकल इंपल्स बना सकते हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में एसए नोड की आंतरिक फायरिंग दर (Intrinsic Firing Rate) सबसे ज्यादा होती है। एक सामान्य वयस्क में आराम करते समय हार्ट रेट (Resting Heart Rate) अक्सर लगभग 60-100 बीट्स प्रति मिनट के बीच होती है, हालांकि व्यक्ति की उम्र, फिटनेस, गतिविधि, तापमान और भावनात्मक स्थिति की हृदय गति में बदलाव हो सकता है।

व्यायाम या तनाव के दौरान तंत्रिका तंत्र की हृदय गति बढ़ सकती है, जबकि आराम के समय हृदय गति कम हो सकती है। इसका मतलब यह है कि एसए नोड केवल एक निश्चित टाइमर की तरह काम नहीं करता है; शरीर की आवश्यकता के अनुसार उसका फायरिंग रेट को नर्वस सिस्टम मॉड्यूलेट करता है।

इलेक्ट्रिकल सिग्नल अटरिया तक कैसे पहुंचता है?

एनसीबीआई के अनुसार एसए नोड से पैदा हुआ इलेक्ट्रिकल इंपल्स राइट अर्टियल के आसपास के हार्ट मसल सेल्स में फैलता है और फिर पूरे अर्टियल मायोकर्डियल तक पहुंचता है। इस सिंग्नल के पहुंचने पर अर्टियल मसल सेल्स विध्रुवित (Depolarize) होते हैं और कॉन्ट्रैक्ट करते हैं। इससे अटरिया में मौजूद ब्लड नीचे निलयों (Ventricles) की ओर जाता है।

इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंपल्स एवी नोड की ओर बढ़ता है। इस समय तक अटरिया अपना कॉन्ट्रैक्शन पूरा करने की दिशा में होते हैं और निलयो (Ventricles) अगले चरण के लिए तैयार होते हैं

हार्ट की हर धड़कन के पीछे एक बेहद संगठित इलेक्ट्रिकल सिस्टम काम करता है। सामान्य लय में विद्युत आवेग की शुरुआत एसए नोड से होती है, इसलिए इसे हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है। सिग्नल पहले अटरिया में फैलकर उन्हें कॉन्ट्रैकट कराता है। इसके बाद यह एवी नोड तक पहुंचता है, जहां थोड़ी देर का विलंब होता है। यह विलंब अटरिया को निलय को रक्त से भरने के लिए पर्याप्त समय देता है। सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया आपको जटिल लग सकती है, लेकिन आपका हृदय हर धड़कन में इसी प्रक्रिया से गुजरता है।

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