सना: पैरों में हवाई चप्पल, हाथों में AK-47, कमर में चाकू लगाए हूती विद्रोहियों ने दुनिया को हैरान किया जब उन्होंने साल 2014 में राजधानी सना समेत यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। अब एक बार हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के साथ जंग छेड़ दी है। गुरुवार को हूती सेनाओं ने सभी को चौंकाते हुए लाल सागर के तट पर स्थित अहम बंदरगाह मोखा पर कब्जा कर लिया। भारी लड़ाई के बीच लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह के नेतृत्व वाली यमनी सेना इस इलाके से पीछे हट गई। अब इस लड़ाई में हूती सेना के AI के इस्तेमाल का मामला सामने आया है।
यमनी जनरल की आवाज का क्लोन
रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों के हमले के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल सालेह की आवाज की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग फैलाई गई, जिसमें यमनी सेना को पीछे हटने के लिए कहा गया। यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज ने आरोप लगाया है कि यह आवाज सालेह की नहीं थी। हूतियों ने AI का इस्तेमाल करके उनकी आवाज की नकल तैयार की थी और इसका इस्तेमाल यमनी सैनिकों को भ्रमित करने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए किया था।
मोचा-स्थित सैटेलाइट टीवी अल-जम्हूरिया टीवी ने पुष्टि की कि हूतियों ने यमन के नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के सैनिकों का मनोबल गिराने के लिए तारेक सालेह की आवाज को AI के जरिए क्लोन किया था। हालांकि, चैनल ने इसे नाकाम कोशिश बताया।
मोखा पर कब्जा क्यों है अहम?
यमन के लाल सागर तट पर स्थित मोखा रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह बाब अल-मदेब जलमडरूमध्य के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट में से एक है। होर्मुज पर ईरान के कब्जे के बाद बाब अल-मंदेब अब बेहद अहम हो गया है। यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के भतीजे सालेह नेशनल-रेजिस्टेंस फोर्सेज के UAE-समर्थित गुट की कमान संभालते हैं और उन्होंने मोखा को मुख्य अड्डा बनाया था। ऐसे में मोचा पर पर कब्जा हूतियों की बड़ी जीत है।