इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने हाल ही में ईरान के साथ अपने बॉर्डर बंद करने का फैसला लिया है। इसके पीछे सुरक्षा कारणों और तस्करी रोकना बताया गया है लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट इसे अमेरिकी दबाव में लिया गया फैसला मान रहे हैं। इस घटनाक्रम ने ईरान-पा-किस्तान पर अविश्वास बढ़ाया है। ये इसलिए अहम है क्योंकि ईरान और अमेरिका की लड़ाई में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ रहा है। हैदराबाद (तेलंगाना) से अमेरिका गए प्रोफेसर मुक्तदर खान का मानना है कि अमेरिका के इशारे पर पाकिस्तान ने बॉर्डर बंद किए ताकि तेहरान पर दबाव बढ़ाया जा सके।
अमेरिका में रहने वाले प्रोफेसर मुक्तदर खान से पाकिस्तानी टिप्पणीकार कमर चीमा से बात की है। चीमा ने ये कहने की कोशिश की है कि ईरान अपनी चला रहा है और बॉर्डर बंद करना शायद सही फैसला हो सकता है। इस पर खान ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान ने ईरान के साथ बॉर्डर बंद करे का फैसला अमेरिका के दबाव में लिया है।
ईरान को घेरने की कोशिश: खान
मुक्तदर खान ने कहा है कि ईरान के तेल का निर्यात होर्मुज स्ट्रेट से तकरीबन बंद है क्योंकि वहा अमेरिकी नाकेबंदी है। ऐसे में उसने अपना तेल बेचने के लिए जमीनी रास्ता अपनाया, जिसमें पाकिस्तान-अफगानिस्तान और कुछ दूसरे रास्ते इस्तेमाल किए गए। खासतौर से पाकिस्तान से रास्ते उनको चीन तक जमीनी रास्ता मिलता है।
खान ने आगे कहा, ‘अब ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके बॉर्डर पर सख्ती की जा रही है ये जमीन से उसके व्यापार को कमजोर करने के लिए है क्योंकि पाकिस्तान से उसे चीन तक का जमीनी रास्ता मिलता है। इसने ईरान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते खराब किए हैं। कैस्पियन सागर के जरिए अब ईरान ट्रेड कर रहा है। ईरान अब इसी रास्ते पर ज्यादा निर्भर हो सकता है।’
ईरानियों में गुस्सा
ईरानी प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी हाल ही में अमेरिकी दबाव में आने के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब को आड़े हाथ ले चुके हैं। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के ईरान के साथ बॉर्डर बंद करने के पीछे अमेरिकी दबाव है। ईरानी शिक्षाविद, राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया टिप्पणीकार मरांडी ने सोशल मीडिया पर ईरान विरोधी पोस्ट के लिए सऊदी अरब के फर्जी अकाउंट बनाने का संकेत दिया है।